-राजगोपाल सिंह वर्मा रोहिल्लाओं के सिरमौर नजीबुदौला का रूहेलखण्ड के इतिहास में एक अलग ही स्थान है। वह वीर, पराक्रमी और कूटनीतज्ञ था, पर उसके बेटे जाबिता खान और फिर पौत्र के संबंध में यह धारणा नहीं बनाई जा सकती। विशेष रूप से उसका महत्त्वाकांक्षी पौत्र गुलाम कादिर इतिहास में एक बदनुमा धब्बे की तरह जाना जाता है। उसने धन-दौलत की हवस में तत्कालीन मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय की आँखें नुचवा ली थीं और तमाम अमानुषिक अत्याचार किये थे। मेरी पुस्तक ‘बेगम समरू का सच’ में इस प्रकरण पर विस्तार से चर्चा है। पूरे संदर्भों के लिए पुस्तक पद्धनी होगी। भाई अमन कुमार त्यागी जी के निर्देश पर किताब के वेअंश प्रस्तुत हैं- सन १७८७ के आखिरी दिनों में एक और तूफान आने की राह देख रहा था. सहारनपुर का शासक रुहेला बागी सरदार जाबिता खां का बेटा गुलाम कादिर हुआ करता था. उसने इस अफरा-तफरी के माहौल का फायदा उठा कर दिल्ली की सल्तनत पर कब्जा करने के अपने ख्वाब को अमली जामा पहनाना शुरू किया. जुलाई १७८७ में लालसोट में महादजी की पराजय के बाद से गुलाम कादिर मराठों के विनाश की पटकथा के तथाकथित ...